परिचय
- ‘अयादि’ शब्द में वर्णों की संख्या 5 है। जैसे– अ + य् + आ + द् + इ
- ‘अयादि’ शब्द में अयादि संधि है। जैसे–
- अ + य् + आ + द् + इ
- ए + आ + द् + इ
- ए + आदि = अयादि
- यह स्वर संधि का भेद है।
- इस संधि में स्वर का स्वर के साथ मेल होता तो होता है परन्तु उत्पन्न विकार स्वर नहीं होता है। अर्थात् स्वर के स्थान पर स्वर नहीं लिखते हैं। इसलिए इन संधि के नाम के साथ स्वर शब्द नहीं लिखा गया है।
- संधि विच्छेद से शब्द निर्माण : यदि ‘ए, ऐ, ओ, औ’ के बाद कोई भी स्वर आए तो ‘ए’ के स्थान पर ‘अय्’, ‘ऐ’ के स्थान पर ‘आय्’, ‘ओ’ के स्थान पर ‘अव्’ तथा ‘औ’ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है।
- शब्द से संधि विच्छेद करना : यदि शब्द को पूरी तरह तोड़ने पर ‘अय्, आय्, अव्, आव्’ दिखाई दे तो ‘अय्’ के स्थान पर ‘ए’, ‘आय्’ के स्थान पर ‘ऐ’, अव् के स्थान पर ‘ओ’ तथा आव् के स्थान पर ‘औ’ हो जाता है।
अयादि संधि के नियम :–
- यदि ‘ए’ के बाद कोई भी स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) आए तो ‘ए’ के स्थान पर ‘अय्’ हो जाता है।
- यदि ‘ऐ’ के बाद कोई भी स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) आए तो ‘ऐ’ के स्थान पर ‘आय्’ हो जाता है।
- यदि ‘ओ’ के बाद कोई भी स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) आए तो ‘ओ’ के स्थान पर ‘अव्’ हो जाता है।
- यदि ‘औ’ के बाद कोई भी स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) आए तो ‘औ’ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है।
| नियम | मेल | उत्पन्न विकार |
|---|---|---|
| 1 | ए + स्वर | अय् + स्वर |
| 2 | ऐ + स्वर | आय् + स्वर |
| 3 | ओ + स्वर | अव् + स्वर |
| 4 | औ + स्वर | आव् + स्वर |
1. ए + स्वर = अय् + स्वर
- यदि पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘ए’ हो तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण कोई भी स्वर हो तो पूर्व पद के अंतिम वर्ण ‘ए’ के स्थान पर ‘अय्’ हो जाता है।
| क्र. सं. | पूर्व पद का अंतिम वर्ण + उत्तर पद का प्रथम वर्ण (ए + स्वर) | उत्पन्न विकार |
|---|---|---|
| (I) | ए + अ | अय (अय् + अ) |
| (II) | ए+ आ | अया (अय् + आ) |
| (III) | ए + इ | अयि (अय् + इ) |
| (IV) | ए + ई | अयी (अय् + ई) |
| (V) | ए + उ | अयु (अय् + उ) |
| (VI) | ए + ऊ | अयू (अय् + ऊ) |
| (VII) | ए + ऋ | अयृ (अय् + ऋ) |
| (VIII) | ए + ए | अये (अय् + ए) |
| (IX) | ए + ऐ | अयै (अय् + ऐ) |
| (X) | ए + ओ | अयो (अय् + ओ) |
| (XI) | ए + औ | अयौ (अय् + औ) |
संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करना
- संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करते समय पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘ए’ अलग कर उसके स्थान पर ‘अय्’ लिखना है। एवं उत्तर पद के प्रथम वर्ण की मात्रा ‘अय्’ के साथ लगानी है। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जैसे–
- ‘ने + अन’ में पूर्व पद (ने) का अंतिम वर्ण (ए) अलग कर उसके स्थान पर ‘अय्’ लिखना है। एवं उत्तर पद (अन) के प्रथम वर्ण (अ) की मात्रा ‘अय्’ के साथ लगानी हैं। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जिससे ‘नयन’ शब्द का निर्माण होता है।
(I) ए + अ = अय
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द |
|---|---|---|
| ने + अन | न् + ए + अन न् + अय् + अन नय् + अन | नयन |
| चे + अन | च् + ए + अन च् + अय् + अन चय् + अन | चयन |
| जे + अ | ज् + ए + अ ज् + अय् + अ जय् + अ | जय |
| विजे + अ | विज् + ए + अ विज् + अय् + अ विजय् + अ | विजय |
| शे + अन | श् + ए + अन श् + अय् + अन शय् + अन | शयन |
(II) ए + आ = अया
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द |
|---|---|---|
| ए + आदि | ए + आदि अय् + आदि | अयादि |
शब्द से संधि विच्छेद करना
- सामान्य तरीका : शब्द से संधि विच्छेद करते समय शब्द को पूरी तरह तोड़ने पर ‘अय्’ दिखाई दे तो ‘अय्’ के स्थान पर ‘ए’ करना है। अब ‘ए’ व ‘ए’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है तथा ‘ए’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है।
- ट्रिक : ‘य’ में जो भी स्वर है उसे लेकर अलग करना है। शेष शब्द में जहाँ ‘अय्’ की ध्वनी आये वहाँ पर ‘ए’ करना है।
| क्र. सं. | शब्द | विस्तार | संधि विच्छेद |
|---|---|---|---|
| 1 | नयन | न् + अ + य् + अ + न् + अ न् + ए + अ + न् + अ ने + अन | ने + अन |
1. नयन :–
- ‘नयन’ शब्द को पूरी तरह तोड़ना है। जैसे– न् +अ + य् + अ + न् + अ
- अब इसमें ‘अय्’ (अ + य्) के स्थान पर ‘ए’ करना है।
- ‘ए’ व ‘ए’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है। जैसे– न् + ए = ने
- ‘ए’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है। जैसे– अ + न् + अ = अन
2. ऐ + स्वर = आय् + स्वर
- यदि पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘ऐ’ हो तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण कोई भी स्वर हो तो पूर्व पद के अंतिम वर्ण ‘ऐ’ के स्थान पर ‘आय्’ हो जाता है।
| क्र. सं. | पूर्व पद का अंतिम वर्ण + उत्तर पद का प्रथम वर्ण (ए + स्वर) | उत्पन्न विकार |
|---|---|---|
| (I) | ऐ + अ | आय (आय् + अ) |
| (II) | ऐ+ आ | आया (आय् + आ) |
| (III) | ऐ + इ | आयि (आय् + इ) |
| (IV) | ऐ + ई | आयी (आय् + ई) |
| (V) | ऐ + उ | आयु (आय् + उ) |
| (VI) | ऐ + ऊ | आयू (आय् + ऊ) |
| (VII) | ऐ + ऋ | आयृ (आय् + ऋ) |
| (VIII) | ऐ + ए | आये (आय् + ए) |
| (IX) | ऐ + ऐ | आयै (आय् + ऐ) |
| (X) | ऐ + ओ | आयो (आय् + ओ) |
| (XI) | ऐ + औ | आयौ (आय् + औ) |
संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करना
- संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करते समय पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘ऐ’ अलग कर उसके स्थान पर ‘आय्’ लिखना है। एवं उत्तर पद के प्रथम वर्ण की मात्रा ‘आय्’ के साथ लगानी है। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जैसे–
- ‘नै + अक’ में पूर्व पद (नै) का अंतिम वर्ण (ऐ) अलग कर उसके स्थान पर ‘आय्’ लिखना है। एवं उत्तर पद (अक) के प्रथम वर्ण (अ) की मात्रा ‘आय्’ के साथ लगानी हैं। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जिससे ‘नायक’ शब्द का निर्माण होता है।
(I) ऐ + अ = आय
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द | विशेष |
|---|---|---|---|
| नै + अक | न् + ऐ + अक न् + आय् + अक नाय् + अक | नायक | |
| गै + अक | ग् + ऐ + अक ग् + आय् + अक गाय् + अक | गायक | |
| शै + अक | श् + ऐ + अक श् + आय् + अक शाय् + अक | शायक | 𑇐 शायक तीर का पर्यायवाची है। |
| गै + अन | ग् + ऐ + अन ग् + आय् + अन गाय् + अन | गायन | |
| ऐ + अ | ऐ + अ आय् + अ | आय |
(III) ऐ + इ = आयि
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द |
|---|---|---|
| गै + इका | ग् + ऐ + इका ग् + आय् + इका गाय् + इका | गायिका |
| नै + इका | न् + ऐ + इका न् + आय् + इका नाय् + इका | नायिका |
| दै + इका | द् + ऐ + इका द् + आय् + इका दाय् + इका | दायिका |
| विधै + इका | विध् + ऐ + इका विध् + आय् + इका विधाय् + इका | विधायिका |
शब्द से संधि विच्छेद करना
- सामान्य तरीका : शब्द से संधि विच्छेद करते समय शब्द को पूरी तरह तोड़ने पर ‘आय्’ दिखाई दे तो ‘आय्’ के स्थान पर ‘ऐ’ करना है। अब ‘ऐ’ व ‘ऐ’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है तथा ‘ऐ’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है।
- ट्रिक : ‘य’ में जो भी स्वर है उसे लेकर अलग करना है। शेष शब्द में जहाँ ‘आय्’ की ध्वनी आये वहाँ पर ‘ऐ’ करना है।
| क्र. सं. | शब्द | विस्तार | संधि विच्छेद |
|---|---|---|---|
| 1 | नायक | न् + आ + य् + अ + क् + अ न् + ऐ + अ + क् + अ नै + अक | नै + अक |
1. नायक :–
- ‘नायक’ शब्द को पूरी तरह तोड़ना है। जैसे– न् +आ + य् + अ + क् + अ
- अब इसमें ‘आय्’ (आ + य्) के स्थान पर ‘ऐ’ करना है।
- ‘ऐ’ व ‘ऐ’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है। जैसे– न् + ऐ = नै
- ‘ऐ’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है। जैसे– अ + क् + अ = अक
3. ओ + स्वर = अव् + स्वर
- यदि पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘ओ’ हो तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण कोई भी स्वर हो तो पूर्व पद के अंतिम वर्ण ‘ओ’ के स्थान पर ‘अव्’ हो जाता है।
| क्र. सं. | पूर्व पद का अंतिम वर्ण + उत्तर पद का प्रथम वर्ण (ए + स्वर) | उत्पन्न विकार |
|---|---|---|
| (I) | ओ + अ | अव (अव् + अ) |
| (II) | ओ+ आ | अवा (अव् + आ) |
| (III) | ओ + इ | अवि (अव् + इ) |
| (IV) | ओ + ई | अवी (अव् + ई) |
| (V) | ओ + उ | अवु (अव् + उ) |
| (VI) | ओ + ऊ | अवू (अव् + ऊ) |
| (VII) | ओ + ऋ | अवृ (अव् + ऋ) |
| (VIII) | ओ + ए | अवे (अव् + ए) |
| (IX) | ओ + ऐ | अवै (अव् + ऐ) |
| (X) | ओ + ओ | अवो (अव् + ओ) |
| (XI) | ओ + औ | अवौ (अव् + औ) |
संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करना
- संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करते समय पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘ओ’ अलग कर उसके स्थान पर ‘अव्’ लिखना है। एवं उत्तर पद के प्रथम वर्ण की मात्रा ‘अव्’ के साथ लगानी है। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जैसे–
- ‘भो + अन’ में पूर्व पद (भो) का अंतिम वर्ण (ओ) अलग कर उसके स्थान पर ‘अव्’ लिखना है। एवं उत्तर पद (अन) के प्रथम वर्ण (अ) की मात्रा ‘अव्’ के साथ लगानी हैं। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जिससे ‘भवन’ शब्द का निर्माण होता है।
(I) ओ + अ = अव
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द | विशेष |
|---|---|---|---|
| भो + अन | भ् + ओ + अन भ् + अव् + अन भव् + अन | भवन | 𑇐 भवन = घर 𑇐 भुवन = संसार |
| पो + अन | प् + ओ + अन प् + अव् + अन पव् + अन | पवन | |
| हो + अन | ह् + ओ + अन ह् + अव् + अन हव् + अन | हवन | |
| भो + अ | भ् + ओ + अ भ् + अव् + अ भव् + अ | भव | |
| शो + अ | श् + ओ + अ श् + अव् + अ शव् + अ | शव | |
| श्रो + अन | श्र् + ओ + अन श्र् + अव् + अन श्रव् + अन | श्रवण | 𑇐 जिन शब्दों में ‘ऋ, र्, ष्’ वर्ण होते हैं वहाँ ‘न’ नहीं आता है अर्थात् ‘न’, ‘ण’ में बदल जाता है। जैसे– श्र = श् + र |
(III) ओ + इ = अवि
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द | विशेष |
|---|---|---|---|
| को + इ | क् + ओ + इ क् + अव् + इ कव् + इ | कवि | |
| हो + इ | ह् + ओ + इ ह् + अव् + इ हव् + इ | हवि | 𑇐 हवि = हवन सामग्री |
| पो + इत्र | प् + ओ + इत्र प् + अव् + इत्र पव् + इत्र | पवित्र | |
| भो + इष्य | भ् + ओ + इष्य भ् + अव् + इष्य भव् + इष्य | भविष्य | |
| हो + इष्य | ह् + ओ + इष्य ह् + अव् + इष्य हव् + इष्य | हविष्य |
(VII) ओ + ऋ = अवृ
| संधि विच्छेद | विस्तर | शब्द | विशेष |
|---|---|---|---|
| वटो + ऋक्ष | वट् + ओ + ऋक्ष वट् + अव् + ऋक्ष वटव् + ऋक्ष | वटवृक्ष | 𑇐 वट = बरगत 𑇐 ऋक्ष = जड़ |
शब्द से संधि विच्छेद करना
- सामान्य तरीका : शब्द से संधि विच्छेद करते समय शब्द को पूरी तरह तोड़ने पर ‘अव्’ दिखाई दे तो ‘अव्’ के स्थान पर ‘ओ’ करना है। अब ‘ओ’ व ‘ओ’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है तथा ‘ओ’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है।
- ट्रिक : ‘व’ में जो भी स्वर है उसे लेकर अलग करना है। शेष शब्द में जहाँ ‘अव्’ की ध्वनी आये वहाँ पर ‘ओ’ करना है।
| क्र. सं. | शब्द | विस्तार | संधि विच्छेद |
|---|---|---|---|
| 1 | भवन | भ् + अ + व् + अ + न् + अ भ् + ओ + अ + न् + अ भो + अन | भो + अन |
1. भवन :–
- ‘भवन’ शब्द को पूरी तरह तोड़ना है। जैसे– भ् +अ + व् + अ + न् + अ
- अब इसमें ‘अव्’ (अ + व्) के स्थान पर ‘ओ’ करना है।
- ‘ओ’ व ‘ओ’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है। जैसे– भ् + ओ = भो
- ‘ओ’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है। जैसे– अ + न् + अ = अन
4. औ + स्वर = आव् + स्वर
- यदि पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘औ’ हो तथा उत्तर पद का प्रथम वर्ण कोई भी स्वर हो तो पूर्व पद के अंतिम वर्ण ‘औ’ के स्थान पर ‘आव्’ हो जाता है।
| क्र. सं. | पूर्व पद का अंतिम वर्ण + उत्तर पद का प्रथम वर्ण (ए + स्वर) | उत्पन्न विकार |
|---|---|---|
| (I) | औ + अ | आव (आव् + अ) |
| (II) | औ+ आ | आवा (आव् + आ) |
| (III) | औ + इ | आवि (आव् + इ) |
| (IV) | औ + ई | आवी (आव् + ई) |
| (V) | औ + उ | आवु (आव् + उ) |
| (VI) | औ + ऊ | आवू (आव् + ऊ) |
| (VII) | औ + ऋ | आवृ (आव् + ऋ) |
| (VIII) | औ + ए | आवे (आव् + ए) |
| (IX) | औ + ऐ | आवै (आव् + ऐ) |
| (X) | औ + ओ | आवो (आव् + ओ) |
| (XI) | औ + औ | आवौ (आव् + औ) |
संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करना
- संधि विच्छेद से शब्द निर्माण करते समय पूर्व पद का अंतिम वर्ण ‘औ’ अलग कर उसके स्थान पर ‘आव्’ लिखना है। एवं उत्तर पद के प्रथम वर्ण की मात्रा ‘आव्’ के साथ लगानी है। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जैसे–
- ‘पौ + अक’ में पूर्व पद (पौ) का अंतिम वर्ण (औ) अलग कर उसके स्थान पर ‘आव्’ लिखना है। एवं उत्तर पद (अक) के प्रथम वर्ण (अ) की मात्रा ‘आव्’ के साथ लगानी हैं। इसके बाद शेष शब्द वैसा का वैसा लिखना है। जिससे ‘पावक’ शब्द का निर्माण होता है।
(I) औ + अ = आव
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द | विशेष |
|---|---|---|---|
| पौ + अक | प् + औ + अक प् + आव् + अक पाव् + अक | पावक | 𑇐 पावक आग का पर्यायवाची है। |
| धौ + अक | ध् + औ + अक ध् + आव् + अक धाव् + अक | धावक | |
| शौ + अक | श् + औ + अक श् + आव् + अक शाव् + अक | शावक | 𑇐 शावक = शेर का बच्चा |
| श्रौ + अक | श्र् + औ + अक श्र् + आव् + अक श्राव् + अक | श्रावक | 𑇐 जैन धर्म की उपासना करने वाले श्रावक कहलाते हैं। |
(III) औ + इ = आवि
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द |
|---|---|---|
| नौ + इक | न् + औ + इक न् + आव् + इक नाव् + इक | नाविक |
| धाै + इका | ध् + औ + इका ध् + आव् + इका धाव् + इका | धाविका |
(IV) औ + ई = आवी
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द |
|---|---|---|
| भौ + ई | भ् + औ + ई भ् + आव् + इ भाव् + इ | भावी |
(V) औ + उ = आवु
| संधि विच्छेद | विस्तार | शब्द | विशेष |
|---|---|---|---|
| भौ + उक | भ् + औ + उक भ् + आव् + उक भाव् + उक | भावुक |
शब्द से संधि विच्छेद करना
- सामान्य तरीका : शब्द से संधि विच्छेद करते समय शब्द को पूरी तरह तोड़ने पर ‘आव्’ दिखाई दे तो ‘आव्’ के स्थान पर ‘औ’ करना है। अब ‘औ’ व ‘औ’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है तथा ‘औ’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है।
- ट्रिक : ‘व’ में जो भी स्वर है उसे लेकर अलग करना है। शेष शब्द में जहाँ ‘आव्’ की ध्वनी आये वहाँ पर ‘औ’ करना है।
| क्र. सं. | शब्द | विस्तार | संधि विच्छेद |
|---|---|---|---|
| 1 | पावक | प् + आ + व् + अ + क् + अ प् + औ + अ + क् + अ पौ + अक | पौ + अक |
1. पावक :–
- ‘पावक’ शब्द को पूरी तरह तोड़ना है। जैसे– प् +आ + व् + अ + क् + अ
- अब इसमें ‘आव्’ (आ + व्) के स्थान पर ‘औ’ करना है।
- ‘औ’ व ‘औ’ से पहले जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर पूर्व पद बनाना है। जैसे– प् + औ = पौ
- ‘औ’ के बाद जो भी वर्ण हैं उन्हें मिलाकर उत्तर पद बनाना है। जैसे– अ + क् + अ = अक
अपवाद
- सामान्य नियम से जो विपरीत जाते हैं वे अपवाद कहलाते हैं।
- अपवाद में संधि के नाम नहीं होते हैं।
- अपवाद में सिर्फ जोड़ा व तोड़ना पूछा जाता है।
अयादि संधि के अपवाद
| संधि विच्छेद | शब्द | विशेष |
|---|---|---|
| गो + अक्ष | गवाक्ष | 𑇐 गव + अक्ष = गवाक्ष (दीर्घ स्वर संधि) 𑇐 गो + अ + अक्ष = गवाक्ष (अयादि संधि) 𑇐 गवाक्ष शब्द में दीर्घ स्वर संधि तथा अयादि संधि के नियम काम करते हैं। इसलिए गवाक्ष शब्द अपवाद है। |
| गो + इन्द्र | गवेन्द्र | 𑇐 गव + इन्द्र = गवेन्द्र (गुण स्वर संधि) 𑇐 गो + अ + इन्द्र = गवेन्द्र (अयादि संधि) 𑇐 गवेन्द्र शब्द में गुण स्वर संधि तथा अयादि संधि के नियम काम करते है इसलिए गवेन्द्र शब्द अपवाद है। |
अयादि संधि की पहचान
- अयादि संधि युक्त शब्दों में अधिकांशतः ‘य’ या ‘व’ वर्ण आते हैं। लेकिन इनसे पहले कोई भी आधा वर्ण नहीं आता है।
- नोट : अयादि संधि के जितने भी उदाहरण होते हैं उन सब में ‘य’ या ‘व’ निश्चित रूप से आता है। लेकिन इनसे पहले कोई भी आधा वर्ण नहीं आता है। यदि ‘य’ या ‘व’ से पहले आधा वर्ण आता है तो वह यण् संधि का उदाहरण होता है।