संधि : परिचय, अर्थ, विच्छेद, विलोम, परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

  • संधि शब्द का अर्थ है– मेल या योग।
  • संधि शब्द का विच्छेद है– सम् (समान/बराबर) + धि (धारण/ग्रहण करना)
  • संधि शब्द का विलोम होता है– विग्रह।
  • संधि में दो पद होते हैं। जैसे– पूर्व पद + उत्तर पद (+ के चिह्न से पहले पूर्व पद, + के चिह्न के बाद उत्तर पद)

संधि की परिभाषा :–

  • आपसी निकटता के कारण दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार (परिवर्तन) को संधि कहते हैं। अर्थात् दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है उसे संधि कहते हैं। जैसे–
संधि विच्छेदशब्द
सम् + धिसंधि
हिम + आलयहिमालय
जगत् + नाथजगन्नाथ
निः + धननिर्धन
पर + उपकार + अर्थपरोपकारार्थ

विशेष :–

  • एक शब्द में एक से अधिक संधियां भी हो सकती है लेकिन प्रत्येक स्थित में दो निकटवर्ती वर्ण ही आपस में मिलते हैं। अर्थात् दो से अधिक वर्ण कभी भी आपस में नहीं मिलते हैं।
  • प्रत्येक शब्द का अंतिम वर्ण स्वर होता है जिसे मात्रा से प्रदर्शित किया जाता है।
  • यदि शब्द के अंत में कोई मात्रा नहीं है तो उसका अंतिम वर्ण ‘अ’ होता है।

  • संधि के तीन भेद होते हैं। जैसे–
क्र. सं.संधि के भेदमेलउदाहरण
1स्वर संधि
(स्वर– 11)
स्वर + स्वरविद्या + आलय = विद्यालय
2व्यंजन/व्यञ्जन संधि
(व्यंजन– 33)
व्यंजन + स्वर
व्यंजन + व्यंजन
वाक् + ईश = वागीश
भगवत् + गीता = भगवद्गीता
3विसर्ग संधि
(विसर्ग– 1)
विसर्ग (ः) + स्वर
विसर्ग (ः) + व्यंजन
निः + अपराध = निरपराध
निः + दोष = निर्दोष

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